कोई भी भाव से उसके अष्टम भाव का स्वामी जो नवमांश में रहा हो उस नवमांश में जब शनि भ्रमण करे तब उस भाव के विनाश /अशुभ फल जातक को प्राप्त होता हे (चन्द्रकला नाडी )
Ex-किसी जातक का मीन लग्न हे और लग्नेश अगर कर्क नवमांश में हे तो जब जब कर्क नवमांश में शनि चलेगा तब जातक को छठे भाव में जो भी देखा जाता हे उस से अशुभ रिजल्ट प्राप्त होगा (छठे से अष्टम लग्न )
भचक्र में कर्क नवमांश ९ बार आता हे पहेले कर्क नवमांश से दूसरे कर्क नवमांश तक (१२ नवमास्थ *३अन्श २० कला =४० अंश (यह स्टार की निशानी हे वो मल्टीप्लाय समजे ))४० का अंतर होगा उसी तरह ४० अंश बाद भी शनि गोचर में इसी कर्क नवमांश में अशुभ रिजल्ट जातक को देगा ८० अंश ,१२० अंश ,१६० अंश २०० अंश पर आया हुआ कर्क नवमांश में शनि जब जब चलेगा तब तब जातक को अशुभ परिणाम मिलेंगे ...
१)लग्नेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -शत्रु पीड़ा ,बीमारी ,नोकरी में तकलीफ (6th house का बुरा फल )
२)द्वितीयेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -पत्नी के लिये अशुभ (द्वितीय भाव सप्तम से अष्टम )
३)तृतीयेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -मृत्यु तुल्य कष्ट ,हानि (तृतीय स्थान अष्टम से अष्टम
४)सुखेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -पिता को कष्ट ,अपने बोस को तकलीफ नवम भाव में से जो भी देखा जाता हे उस से अशुभ परिणाम (चतुर्थ भाव नवम भाव से अष्टम )
५)पंचमेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -मित्र को कष्ट ,गवर्मेंट की तरफ से संकट (पंचम भाव दशम भाव से अष्टम )
६)षष्ठेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -पितव्य(पिता के भाई ओ के लिये अशुभ )एकादश भाव में जो भी देखा जाता हे उस से अशुभ परिणाम (6th haouse एकादश भाव से अष्टम )
७)सप्तमेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -अनजानी जगह पर ट्रावेलिंग वो भी बिना मर्जी करनी पड़े होस्पिटल की बीमारी ,(सप्तम भाव द्वादश भाव से अष्टम )
८)अष्टमेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -देह पीड़ा ,शारीरिक तकलीफ (अष्टम भाव लग्न से अष्टम )
९)भाग्येश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -धन क्षय ,परिवार में हानि ,(नवं भाव द्वितीय भाव से अष्टम )
१०)कर्मेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -भाई /बहेन को कष्ट ,ससुर को कष्ट (दशम भाव तृतीय भाव से अष्टम )
११)लाभेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -माता जी को कष्ट (एकादश भाव चतुर्थ भाव से अष्टम )
१२)व्ययेश जिस नवमांश में हो उस नवमांश में शनि -संतान को कष्ट (द्वादश भाव पंचम भाव से अष्टम )
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यह नियम व्यवहार में अनुभव सिध्ध हे ,
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