... सूर्य पृथ्वी के लिए मुख्य उर्जा स्तोत्र हे ...सूर्य के दो प्रकार के किरण होते हे १)इन्फ्रा रेड २)अल्ट्रा वायोलेट सूर्य के किरणों ने कुल ७ रंग होते हे *लाल *नारंगी *पीला *हरा *नीला *नील ब्लू *जमुनिया इसमें लाल रंग में अल्ट्रा रेड किरण ज्यादा होते हे ,और जमुनिया रंग में अल्ट्रा वायोलेट किरण ज्यादा होते हे ,मुख्य ८ दिशा ओ में सूर्य का उदय पूर्व में होता हे सूर्य के ७ किरणों की जमीन और मकान पर अलग अलग असर होती हे एक साल में ६ माहिना यानि २२ दिसंबर से २० जून सूर्य उत्तरायण में होता हे और बाकि के ६ महीने २१ जून से २१ दिसंबर सूर्य दक्षिणायन में होता हे इस लिए सूर्य उदय की दिशा कुछ अंश बदलाती हे इस लिए ये किरण अपनी जमीन पर पड़े ये आवश्यक हे वास्तु के इशान भाग में ज्यादा बांधकाम नही करना चाहिए इस का उद्धेश्य यह हे की ये किरण बड़े प्रमाण में पानी में गुल जाते हे इस के लिए वास्तु के इशान भाग में पानी होना आवश्यक हे इशान भाग में कुआ .कूप नलिका .ट्यूबवेल पानी का होज हो तो शुभ इस के बदले इशान में बांध काम किया हो तो ये किरण रुक जाते हे इस लिए इन्शान को इस किरण का पुरता फायदा मिलता नही इशान भाग में यदि शोचालय हो तो अच्छी असर देने वाले ये किरण दूषित होते हे ,इस के फायदा होने के बजाय नुकशान होता हे वास्तु शास्त्र में अग्नि कोण का साधारण महत्व हे सूर्योदय के बाद मानव जीवाण की प्रक्रिया पैर विपरीत असर देने वाले इन्फ्रा रेड किरण जो पानी में गुल जाये तो सजीवो के नुकशान देते हे इस का आधार लेके वास्तु शास्त्र में अग्नि और पानी ये दोनों तत्व एक बुसरे के साथ मेल नही खाने वाले तत्व हे ऐसा कहा गया हे की सुय जब जब ऊपर आये या अस्त हो तब तब मानव के शारीर की जिव रासायनिक क्रिया पर और वास्तु पर उस का असर होता हे सूर्य अस्त होने के बाद सूर्य क्र किरण जमीन पर काम नही करते तब दूसरऐ ग्रहों की प्रबलता यानि उनके किरणों की प्रबलता बढ़ जाती हे .............
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