"योग चैव मृति यदा युग पदे वेकस्त दांतु क्षमा |
स्तस्यादौ स्वविपाक एव सुमुहाध्योगं प्रकृर्या दशौ ||"
.
जो दशानाथ जन्म कुंडली में अधिपत्य के कारण
पापी हुआ हो और मारक के गुणों से प्रभावित हुआ हो
ऐसा दशा नाथ जो कुंडली में कोई राजयोग बनाता हो ]
तो ऐसी विशेष स्थिति में वो दशानाथ उस की दशा
के आरम्भ में राजयोग का फल देने का सामर्थ्य
रखता हे ....
स्तस्यादौ स्वविपाक एव सुमुहाध्योगं प्रकृर्या दशौ ||"
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जो दशानाथ जन्म कुंडली में अधिपत्य के कारण
पापी हुआ हो और मारक के गुणों से प्रभावित हुआ हो
ऐसा दशा नाथ जो कुंडली में कोई राजयोग बनाता हो ]
तो ऐसी विशेष स्थिति में वो दशानाथ उस की दशा
के आरम्भ में राजयोग का फल देने का सामर्थ्य
रखता हे ....
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