शुक्रवार, 25 मई 2012

विपरीत राजयोग के समर्थन में श्लोक

"योग चैव मृति यदा युग पदे वेकस्त दांतु क्षमा |
स्तस्यादौ स्वविपाक एव सुमुहाध्योगं प्रकृर्या दशौ ||"
.
जो दशानाथ जन्म कुंडली में अधिपत्य के कारण 
पापी हुआ हो और मारक के गुणों से प्रभावित हुआ हो 
ऐसा दशा नाथ जो कुंडली में कोई राजयोग बनाता हो ]
तो ऐसी विशेष स्थिति में वो दशानाथ उस की दशा 
के आरम्भ में राजयोग का फल देने का सामर्थ्य 
रखता हे ....

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