शुक्रवार, 25 मई 2012

वर्जित दान (ग्रहानुसार)



जो ग्रह किसी जातक का उच्च का अपने घर का हो उस ग्रह की वस्तुओं का दान उस जातक को नहीं करना चाहिए। मान लो किसी जातक का चन्द्र नं. 2, 4 है तो उसे दूध, चावल, चांदी या मोती का दान कभी नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार किसी का मंगल् श्रेष्ठ यानि उच्च हो तो उसे मिठाई का दान नहीं करना चाहिए। किसी का सूर्य उच्च का हो उसे गुड या गेहूं का दान नहीं करना चाहिए। बुध श्रेष्ठ वाले को मूंग साबूत, हरा कपड़ा, कलम, फूल, मशरूम (खुम्ब) तथा घड़ा आदि का दान नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार बृहस्पति उच्च में सोना, पीली वस्तु, पुस्तक; शुक्र उच्च वाले को सिले हुए कपड़े और शनि उच्च वाले को शराब, मांस, अण्डा, तेल या लोहे का दान नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार यदि ये ग्रह अशुभ या नीच पड़े हो तो इन ग्रहों की वस्तुओं का दान या मुफ्त में, नहीं लेना चाहिए।

मन्दिर जाना वर्जित
जब किसी जातक का दूसरा घर नं. 2 खाली हो और उसके आठवें घर में पापी ग्रह विशेष रूप से शनि आ बैठे तो उस जातक को मन्दिर नहीं जाना चाहिए। बाहर से ही अपने इष्टदेव को नमस्कार कर देना चाहिए। नं. 6, 8,12 में शत्रु ग्रह बैठे हो और नं. 2 खाली हो तब भी जातक के लिए मन्दिर जाना वर्जित है।
चन्द्र न. 6 वाला व्यक्ति यदि दूध या पानी का दान करे या कुआं, नल, तालाब लगवाये या उनकी मरम्मत करवाये तो दिन प्रतिदिन उस का परिवार घटता रहेगा, मृत्यु सर पर मड़राती रहेगी। (शमशान/अस्पताल में नल का कोई वहम नहीं)।
शनि 8 वाला व्यक्ति यदि सराय, धर्मशाला, यात्री निवास बनाये तो आप बेघर और निर्धन हो जाये।
शनि न. 1 बृहस्पति न. 5 भिखारी को यदि ताम्बें का पैसा या ताम्बे का बर्तन दे तो सन्तान नष्ट हो।
बृहस्पति 10 चन्द्र 4 यदि पूजा स्थान बनवाये तो झुठे आरोपों में फांसी तक पा सकता है।
शुक्र 9 वाला व्यक्ति यदि अनाथ बच्चों को गोद लेले या उन्हे आने पास रखे तो उसकी मिट्टी खराब।
चन्द्र न. 12 वाला यदि धर्मात्मा या साधु को प्रतिदिन रोटी खिलाये, दूध पिलाये, या बच्चों को निशुल्क शिक्षा का प्रबन्ध करे या स्कूल पाठशाला आदि खोले तो ऐसा कष्ट पायेगा कि अन्त समय कोई पानी तक देने वाला नहीं होगा।
बृहस्पति 7 वाला व्यक्ति किसी को वस्त्र दान न करे यदि करेगा तो आप र्निवस्त्र हो जायेगा।
सुर्य 7, 8 सुबह शाम का दान जहर बराबर।

कुछ विशेष योग
सूर्य, शनि के साथ यदि शुक्र, केतु, चन्द्र तो क्रमश: स्त्री, पुत्र, माता, कष्ट में होने की सम्भावना।
सूर्य मंगल के साथ यदि शुक्र, केतु, चन्द्र तो क्रमश: स्त्री, पुत्र माता, पिता (बालक की 22-24) वर्ष आयु में बीमार
शुक्र 3, सूर्य, चन्द्र, केतु 9 तो किसी स्त्री के माध्यम से 22 से 24 वर्ष आयु में विदेश यात्रा का निमंत्रण प्राप्त होगा।
चन्द्र केतु दोनों साथ हो तो माता पुत्र दोनों कष्ट में,
केतु न. 4, राहु न. 10 तो सन्तान 34 - 42 वर्ष आयु में यदि पहिले हो तो वह अपना बीज नहीं।
बृहस्पति 6 तो पिता को सांसा की बीमारी (दमा नहीं) सोना खो जाये।
बुध 2 तो घर में सूत निवार के गोले पड़े होते हैं उनकी खोल दें क्योंकि भाग्य उनमे लिपटा हुआ है।
चन्द्र 6 तो माता को कष्ट, सन्तान के लिए खरगोश पाले, मर जाये तो दूसरा ले आये।
बृहस्पति 7 तो पिता से कम पटती है अत: मूगां धारण करे।
शुक्र केतु और 5वां घर मन्दा तो सन्तान के लिए खरगोश पाले, मर जाये तो दूसरा ले आये।
शुक्र केतु यदि विवाह न करवाये तो अन्धा हो जावे। वर्षफल के अनुसार जब न. 8 का ग्रह न. 2 में आता है तो भाग्योदय होता है। बृहस्पति जब न. 1, 4,9 में आते है तो विशष खुशी देते हैं। अकेला शुक्र जब न. 2,4,7 में होगा, तो जातक की कई पत्नीयां होगी और जीवीत होगी।
सूर्य शुक्र तो स्त्री बीमार खून की बीमारी, आप्रेशन से मृत्यु, पुत्र 2, अकेला बुध जब 1,5,9,12 में हो तो एक ही स्त्री होगी सन्तान हो या न हो।
मंगल न. 6 तो चाचे दो, भाई दो
शुक्र न. 2 तो ससुराल के लिए निकम्मा
केतु 9 तो मामा नानकों पर भारी
शनि और चन्द्र को टकराव आने पर आंखो का आप्रेशन
शनि, बृहस्पति के मिलने पर मकान बने परन्तु अपनी स्त्री नाराज
राहु 5 तो सन्तान पर बिजली का काम करे, (वर्षफल के अनुसार 8 वें घर में केतु हो तो पुत्र पर, 8 वें घर में बुध हो तो पुत्री पर)
सूर्य 6, बुध 12 तो हाई ब्लड प्रेशर
सूर्य 6, शनि 12 तो पत्नी की मृत्यु
शुक्र 3 तो अपना मकान न बनाये, यदि बनायेगा तो उजड़ जायेगा।
शुक्र तो विधवा स्त्री से प्यार बर्बादी का कारण बनेगा।
शुक्र न. 7 भाग्योदय विवाह के बाद
जब बृहस्पति और शुक्र 1, 7 में आते है तो विवाह का योग बनता है, विवाह के बाद जब वे उन घरों में आते है तो भी शुभ फल देते है बृहस्पति अवश्य देते है शुक्र दे या न दे।
यदि मिथुन लग्न की कुण्डली है और लग्न का स्वामी (बुध) नं. 11 में हो और बुध के साथ सूर्य हो और बृहस्पति की दृष्टि लग्न पर पड़ रही हो तो जातक को प्रत्येक कार्य सफलता प्राप्त होती रहती है।
यदि मिथुन लग्न की कुण्डली है और लग्न का स्वामी (बुध) नं. 11 में हो और बुध के साथ सूर्य हो और बृहस्पति की दृष्टि लग्न पर पड़ रही हो तो जातक को प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होती रहती है।
लग्न तुला हो, लग्नेश और पंचमेश की युति हो रही हो तो भी जातक को ज्योतिश में रूचि होती है।
कुण्डली में जब धनु के चन्द्र, और कर्क के बृहस्पति हो तो जातक उच्च कोटि का साहित्यकार होता है।
कुम्भ लग्न में मंगल और शुक्र दोनों स्थित हो तो जातक अत्यधिक कामी होता है। व्यभिचार के कारण उसे जेल तक जाना पड़ सकता है।
नं. 5 में मंगल, केतु या सूर्य हो तो जातक का पुत्र उसकी प्रतिष्ठाा को धब्बा लगाने वाला होता है।
वृश्चिक लग्न हो, लग्न में सूर्य और लग्नेश (मंगल) नं. 2 में हो, बुध साथ हो तो जातक युवावस्था में ही पागल हो जाता है। कारागार में जीवन व्यतीत करे।
मीन लग्न हो, लग्न में मंगल हो तो कुण्डली मिलाये बिना विवाह मत करें। यदि करेगा तो छ: माह में तलाक हो जायेंगा।
खाना नं. 9 में नीच का शनि हो और नं. 12 में कर्क राशि का मंगल हो अथवा इनके साथ साथ नं. 10 में राहु हो तो जातक का पिता निर्धन हो जाता है। जातक को भी कठिनाई से जीवनयापन करना पड़ता है।
यदि तीसरे घर का स्वामी 1 से 5 हो तो प्रथम सन्तान को हानि करता है।
शनि नं. 3 हो तो जातक की रोटी अच्छी परन्तु नकद धन की कमी रहती है।
यदि कुण्डली में जातक की कुण्डली कर्क लग्न की हो, अर्थात पहिले घर का अंक हो दूसरा घर में राहू, आठवें घर में बुध हो और नौंवें घर में सूर्य हो तो जातक एक प्रतिष्ठित ज्योतिषी बनता है।
जिस जातक का जन्म13 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच होता है वह अन्यों की अपेक्षा कुछ विशेष व्यक्ति ही होता है। अत: इन दिनों सूर्य उच्च का होता है उसके अंशा भी ठीक होते हैं।
राहु नीच या उन घरों में जहां व नीच प्रभाव देता है। या बुध और राहु 3,8,9,12 में हो और शनि न. 2 हो तो ऐसा जातक विवाह के बाद अपने ससुर को बर्बाद कर देता है।
सुर्य 4, मंगल 10 तो एक आंख से काणा।
बृहस्पति और शुक्र कामाग्नि अधिक; चन्द्र और बृहस्पति न. 11 माता. नानी, दादी सास, बड़ा, भाई, तया, पेट दर्द की बीमारी के कष्ट में जीवन यापन करेंगें।
सुर्य और शुक्र इकट्ठे या सूर्य और शनि का दृष्टि के अनुसार टकराव, सूर्य शुक्र और बुध इकट्ठे तो बिना समय तलाक, जुदाई, चाल चलन की बदनामी सच्ची या झूठी प्राय: अवश्य होती है।

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