१)लाभेश्वरे केन्द्रगते त्रिकोणे वा समन्विते |
लाभे वा पापसंयुक्ते धनलाभमूदीरयेत||
(सर्वार्थ चिंतामणि )
.
अर्थात
लाभेश केन्द्र स्थान या त्रिकोण स्थान या ११ स्थान में भ्रमण
कर रहा हो तब कोई पाप गृह (शनि ,सूर्य , मंगल )
लाभेश के साथ युति कर रहा हो तो जातक को
धन लाभ होता हे
.
२)लाभाधिमाक्रांतमासे देवकाणांशे च मसगे |
शुभद्रष्टियुतेमास विर्शेषेण धनात्रम:||
(देवकरम)
.
अर्थात -
सूर्य ११ वे भाव का स्वामी जिस राशि में हो उस राशि में
लग्न की द्रेष्काणतुल्य राशि ,शुभ गृह द्रष्ट राशि
इस राशि ओ में सूर्य का भ्रमण हो उस मास में
जातक को विशेष कर के धनलाभ होता हे ...
लाभे वा पापसंयुक्ते धनलाभमूदीरयेत||
(सर्वार्थ चिंतामणि )
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अर्थात
लाभेश केन्द्र स्थान या त्रिकोण स्थान या ११ स्थान में भ्रमण
कर रहा हो तब कोई पाप गृह (शनि ,सूर्य , मंगल )
लाभेश के साथ युति कर रहा हो तो जातक को
धन लाभ होता हे
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२)लाभाधिमाक्रांतमासे देवकाणांशे च मसगे |
शुभद्रष्टियुतेमास विर्शेषेण धनात्रम:||
(देवकरम)
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अर्थात -
सूर्य ११ वे भाव का स्वामी जिस राशि में हो उस राशि में
लग्न की द्रेष्काणतुल्य राशि ,शुभ गृह द्रष्ट राशि
इस राशि ओ में सूर्य का भ्रमण हो उस मास में
जातक को विशेष कर के धनलाभ होता हे ...
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