धातु , मूल एवं जीव चिन्ता ....
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षट्पञ्चाशिका अनुसार
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1)स्वान्शे विलग्ने यदि वा त्रिकोणे स्वान्शे स्थित: पश्यति धातुचिंतम् |
परांशकस्थश्च करोति जिवं, मूलं परांशोपगत: परांशम् || (६)
.
कोई भी ग्रह स्व नवांश में स्थित हो और लग्न या त्रिकोण स्थित स्वनवांश राशि को देखे
तो धातु चिंता
ग्रह परनवांश में स्थित हो और लग्न या त्रिकोण स्थित स्वराशि नवांश को देखे तो जिव चिंता ..
ग्रह परनवांश में स्थित हो और लग्न या त्रिकोण स्थित पर राशि नवांश को देखे तो मूल चिंता
.
धातु दो प्रकार की होती हे ....धाम्य और अधाम्य धाम्य यानी सोना चांदी .......विगेरा ...और
अधाम्य यानी मृतिकादी (मिट्टी)
ग्रह और लग्न के नवांश अनुसार धातु का विचार करना चाहिए
नवांश चर हो तो धाम्य धातु स्थिरआभाव नवांश हो तो अधाम्य धातु और द्विस्वभाव हो तो धाम्याधाम्य..........
जिव के तिन प्रकार हे द्विपाद, चतुष्पद, और सरीसृप
ग्रह और लग्न के नवांश अनुसार जिव का विचार करना चाहिए
मिथुन , तुला ,कन्या ,धन का पूर्वार्ध और कुंभ राशि नवांश हो तो द्विपाद
जिव मेष , वृषभ ,सिंह और धन का उतरार्ध ..चतुष्पद जिव
कर्क , वृश्चिक , मकर और मीन नवांश सरीसृप समजना चाहिए
मूल का एक ही प्रकार हे वृक्ष से लेके तृण तक सब की मूल में गिनती
होती हे '
चर राशि हो तो स्थल संबंधी मूल समजना चाहिए
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षट्पञ्चाशिका अनुसार
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1)स्वान्शे विलग्ने यदि वा त्रिकोणे स्वान्शे स्थित: पश्यति धातुचिंतम् |
परांशकस्थश्च करोति जिवं, मूलं परांशोपगत: परांशम् || (६)
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कोई भी ग्रह स्व नवांश में स्थित हो और लग्न या त्रिकोण स्थित स्वनवांश राशि को देखे
तो धातु चिंता
ग्रह परनवांश में स्थित हो और लग्न या त्रिकोण स्थित स्वराशि नवांश को देखे तो जिव चिंता ..
ग्रह परनवांश में स्थित हो और लग्न या त्रिकोण स्थित पर राशि नवांश को देखे तो मूल चिंता
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धातु दो प्रकार की होती हे ....धाम्य और अधाम्य धाम्य यानी सोना चांदी .......विगेरा ...और
अधाम्य यानी मृतिकादी (मिट्टी)
ग्रह और लग्न के नवांश अनुसार धातु का विचार करना चाहिए
नवांश चर हो तो धाम्य धातु स्थिरआभाव नवांश हो तो अधाम्य धातु और द्विस्वभाव हो तो धाम्याधाम्य..........
जिव के तिन प्रकार हे द्विपाद, चतुष्पद, और सरीसृप
ग्रह और लग्न के नवांश अनुसार जिव का विचार करना चाहिए
मिथुन , तुला ,कन्या ,धन का पूर्वार्ध और कुंभ राशि नवांश हो तो द्विपाद
जिव मेष , वृषभ ,सिंह और धन का उतरार्ध ..चतुष्पद जिव
कर्क , वृश्चिक , मकर और मीन नवांश सरीसृप समजना चाहिए
मूल का एक ही प्रकार हे वृक्ष से लेके तृण तक सब की मूल में गिनती
होती हे '
चर राशि हो तो स्थल संबंधी मूल समजना चाहिए
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