शुक्रवार, 8 मार्च 2013

रुद्रा अभिषेक द्रव्यम ...
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सर्व कर्माणि सन्त्यजय सुशांत मनसो यदा |
रुद्राभिषेक कुर्वन्ति दुःख नाशो भवेद ध्रुवम् ||
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अर्थात - सब कर्मो को त्याग कर शांत मन से रुद्राभिषेक करने से सर्व दुखो का निश्चित रूप से नाश होता हे ...
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सर्व कामनाओ की पूर्ति के लिए किस द्रव्य से रुद्राभिषेक करना चाहिए
इस का उलेख शास्त्र में मिलता हे
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१.वृष्टि के लिए .जल से
२. रोग मुक्ति के लिए कुशोद्क (दर्भ मिश्रित जल )जलधारा से
३.वाहन इत्यादि की प्राप्ति के लिए दही से
४.श्री (सुंदरता )की प्राप्ति के लिए गन्ने के रस या नारियेल के जल से
५.धन प्राप्ति केलिए मधु से
६.मोक्ष प्राप्ति के लिए तीर्थ जल से
७.वन्ध्या (संतान रहित )काक वन्ध्या (जो स्त्री को एक संतान के बाद दूसरी बार गर्भ ना रहेता हो )और मृत वत्सा (जो स्त्री को गर्भ पात होता हो या मृत बालक का जन्म होता हो ऐसी स्त्री )को गाय के शुध्ध दूध से अभिषेक करवाना चाहिए
८.बुखार का प्रकोप दूर करने के लिए जल से
९.प्रमेश रोग (डायाबितिज़ )की शांति के लिए और तन्दुरस्त जीवन के लिए
भी गाय के दुष् से अभिषेक करवा न चाहिए
१०.जडबुध्धि के नाश के लिए शक्कर मिश्रित जल या दूध से
११.शत्रु ओ के नाश के लिए सरसों के तेल से
१२.रोग न हो इस के लिए सरसों मिश्रित जल से
१३.असाध्य बीमारी से छुटकारा पाने के लिए .मधु मिश्रित नारियल जल से
१४. पुत्र प्राप्ति के लिए शक्कर मिश्रित जल से
इस के उपरान्त आम का रस , मोसम्बी का रस ,पंचामृत ,गंधोदक ,इत्र ,सर्व औषधि जेसे अलग अलग प्रवाहि द्रव्यों से अलग अलग कामना ओ के लिए रुद्राभिषेक किया जाता हे
कुंडली में अशुभ योग जेसे ..कालसर्प , केमद्रुम योग ,सर्पयोग ,पिशाच बाधा,नागदोष,श्रापित योग ,जेसे योगो की शांति के लिए भी भिन्न भिन्न प्रकार के द्रव्य से अभिषेक किया जाता हे
अन्य विद्वानों के मत अनुसार संतति प्राप्ति के लिए शतरुद्रिय रुद्राभिषेक करना चाहिए
यमुना , नर्मदा जेसे तीर्थ स्थलों के स्थान पे जा कर रुद्राभिषेक करनेसे शिघ्र ही फल की प्राप्ति होती हे

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