शनिवार, 17 अगस्त 2013

गर्भाधान

गर्भाधान (बृहद जातक और अन्य ग्रंथो के आधार पर )
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मंगल और चन्द्र के हेतु से स्त्री को हर मास रजो दर्शन प्रकट होता हे पर कोनसा रजो दर्शन में स्त्री को गर्भ धारण होगा इस विषय में ग्रंथो में कुछ नियम बताये गए हे
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स्त्री की जन्म राशी से चंद अनुपचय राशि यानी १/२/४/५/७/८/९ / १२ में हो और उस चन्द्र पर मंगल की द्रष्टि हो तो ऐसा रजो दर्शन गर्भ धारण करता हे
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ex....स्त्री की जन्म राशि सिंह हे और रजो दर्शन के वक्त पंचांग में चन्द्र वृश्चिक का हुआ तो वह चन्द्र स्त्री की राशी से ४ भाव में उसी वक्त गोचर मंगल की(मंगल मेष ,वृषभ ,सिंह ) द्रष्टि चद्र पर हो तो ऐसा रजो दर्शन गर्भ धारण करेगा

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ऊपर लिखा हुआ योग बालिका ,वृध्ध,रोगी और बांज स्त्री को लागु नही होगा
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गर्भ समज
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ऊपर कहे अनुसार रजस्वला स्त्री शुध्ध होने के बाद पुरुष का बिंदु ग्रहण करे उस समय की कुंडली को आधान कुंडली कहा जाता हे
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आधान कुंडली में सूर्य ,चन्द्र ,शुक्र ,और मंगल नवमांश में स्वग्रही हो तो गर्भ संभव जानना चाहिए
पर यह चारो ग्रह कदी अपनी राशी के नव्माश में न हो सिर्फ सूर्य और शुक्र अपनी राशि /नवमांश में हो तो तो गर्भ संभव जानना चाहिए
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आधान कुंडली के लग्न ,पंचम , नवं भाव में गुरु हो तो भी गर्भ संभव जानना चाहिए
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गर्भाधान के समय ..नभो मंडल में सूर्य /केतु युति प्रति युति ..नक्षत्र परिवर्तन हो तो उस वक्त गर्भाधान नही करना चाहिए
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रजो दर्शन के बाद १६ रात्री के अन्दर गर्भ रहेता हे ऐसा पंडितो का मत हे अन्य मत अनुसार १२ से १६ रात्रीओमे गर्भ रहेता हे
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स्त्री को रजस्वला प्राप्त होने से १६ रात्री पर्यंत ॠतुकाल जानना चाहिए उस में पहेली ४ रात्री स्त्री -पुरुष सैयोग के लिए अयोग्य हे अन्य बेकी रात्रि में ॠतुदान से पुत्र प्राप्त होता हे
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४थी रात्रि से १३ रात्रि में संतति होती हे
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बेकी(सम) रात्री अनुसार
४- अल्प आयुष्यवाला पुत्र
६-वंश करता पुत्र
८-पुत्र
१०- प्रभावशाली पुत्र
१२-श्रेष्ठ पुत्र
१४-सद्गुणी पुत्र
१६-सर्वज्ञ पुत्र
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एकी (विषम ) रात्री अनुसार
५-कन्या
७-बांझ कन्या
९-सुंदर कन्या
११-कुरूप कन्या
१३-पापी कन्या
१५-लक्ष्मीवती कन्या
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जिस मास का स्वामी क्रूर ग्रह से पीड़ित हो उस मास में गर्भ होने की सम्भावना होती हे
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गर्भ मासों के स्वामी
प्रथम मास -शुक्र
द्वितीय-मंगल
तृतीय-बृहस्पती
चतुर्थ -सूर्य
पंचम चन्द्रमा
षष्टम -शनी
अष्टम -आधान कुंडली का लग्नेश
नवम-चन्द्र
दशम -सूर्य

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