कन्या विवाह और गुरुबल
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स्त्रीणां गुरुबलं श्रेष्ठं
पुरुषाणां रवेर्बलम।
तयो:चंन्द्रबलं श्रेष्ठमिति गर्गेण
भाषितम॥
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भावार्थ-स्त्री के लीये गुरुबल और पुरुष के
लीये सूर्यबल और दोनो के लीये चंद्रबल
देख के विवाह करना श्रेष्ठ हे
ऐसा गर्गादी ऋषी कहते हे
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कन्या के विवाह समय कन्या की जन्म
राशि या नाम राशि से 4,8,12 वा गुरु
चल रहा हो तो उस समय विवाह
नही करना चाहीये
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परंतु यह वचन उस समय का हे जब बाल
विवाह होते थे आज के जमाने मे
परीस्थिती भीन्न हे
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नारदजी का मत गुरुबल के विषय मे
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गुरुरबलो रविरशुभ:प्राप्त े ऐकादशाब्दं
या कन्या ।
गणयति गणक विशुद्ध: स
गणको ब्रह्रिहा भवति ॥
,
ऋषि नारद कहते हे जो कन्या 11 साल से
उपर की हो और विवाह मुहूर्त मे
ज्योतिषी पंडीत गुरुबल या सूर्य बल
की गीनती करता हे वह ब्रह्म हत्या के
पाप का भागीदार बनता हे
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रजस्वलाया: कन्याया:गुरुशुद ्धिँ न
चिन्तयेत ।
सर्वत्रापि शुभं दद्याद द्वादशाब्दात
परं गुरु:॥
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भावार्थ-रजस्वला होती कन्या या 12
साल से उपर की कन्या के लीये गुरुबल
का विचार नही करना चाहीये यहा गुरु
शुद्ध ही हे
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अतिप्रोढा तु या कन्या कुलधर्म
विरोधिनी।
अविशुद्धापि सा देया चन्द्रलग्नबलेनत ु॥
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भावार्थ-अतिप्रो ढा यानी 16 साल से
उपर की कन्या के लीये गुरुबल
नही देखना चाहीये चंद्रबल दिनशुद्धि और
लग्नबल देखके विवाह करना चाहीये
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