प्रश्न शास्त्र अनुसार नष्ट वस्तु ज्ञान
.
प्रश्न कुंडली में चतुर्थ भाव चोरी हुई चीज का हे ,यानी चतुर्थ स्थान चोरी हुई चीज कहा हे यह जानने में उपयोगी हे .चतुर्थ भाव में जो राशी हो ,वह राशि चोरी हुई चीज कहा हे उस तरफ इशारा करती हे
मेष ,सिंह ,धन,अग्नि तत्व राशि हे ,यानी उस चीज के पास अथवा जहा आग सम्बन्धी कोई भी कार्य होता हो वहा वृषभ ,कन्या ,मकर पृथ्वी तत्व राशी यानी जमीन के पास या अन्दर दबाई हुई हो ..कर्क ,वृश्चिक,मीन जलचर राशि पानी रखनेकी जगह के पास (घर में )नदी ,दरिया किनारा के पास या पानी में छिपाई हुई हो
चतुर्थ भाव में रहा ग्रह या चतुर्थेश बनता ग्रह चोरी हुई चीज कहा हे उसका दिशा निर्देश करता हे
चतुर्थ स्थान में शनि हो या चतुर्थेश शनि हो तो चीज कोई गन्दी जगह में जहा कूड़ा कचरा फेकने की जगह में छुपाई हे ,,इसी प्रकार चन्द्र हो तो पानी ,बाथरूम ,कुए ,तालाब के पास गुरु हो तो मंदिर ,धार्मिक स्थान या पवित्र जगह मंगल हो तो अग्नि के पास ,शुक्र हो तो बिस्तर के पास -निचे या आजूबाजू ,बुध हो तो लायब्रेरी (किताबे रखने की जगह )रसोई घर और सूर्य हो तो घर के मुखिया के बेठने की सिट के आसपास छुपी हुई हे
.............................................
नष्ट वस्तु दिशा ज्ञान
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दिग्वाच्या केंद्रगतैरससंभवे वा वदेद्विलग्नर्क्षात्|
मध्याच्च्युतैर्विलग्नान्नवांशकैर्योजना वाच्या||(षट पंचाशिका ६/४)
.
अर्थ
केंद्र स्थित बलवान गृह से नष्ट वास्तु की दिशा का विचार करना चाहिए
यह संभव न हो तो लग्न में स्थित राशी की दिशा के अनुसार निर्णय करना चाहिए लग्न स्थित नवमांश अनुसार वास्तु की दुरी का निर्णय करना चाहिए
.
प्रस्तुत श्लोक नष्ट वस्तु की दिशा और दुरी का निर्देश करता हे
केंद्र में स्थित ग्रह से नष्ट वस्तु की दिशा का निर्णय करना चाहिए जो केंद्र में एक से ज्यादा ग्रह हो तो सबसे ज्यादा बलवान ग्रह से दिशा निर्णय करना चाहिए
केंद्र में सभी ग्रह निर्बल हो या केंद्र में ग्रह न हो तो लग्न में जो राशी हो उस राशी द्वारा निर्णय करना चाहिए
लग्न में प्रथम ,द्वितीय........नवम जो नवमांश हो उस से वस्तु की दुरी का निर्देश करे
................
सूर्यादि ग्रहों की दिशा
.
सूर्य - पूर्व दिशा
मंगल -दक्षिण दिशा
शनि-पश्चिम दिशा
बुध -उत्तर दिशा
.
शुक्र -अग्नि कोण
राहू- नैरुत्य कोण
चन्द्र -वायव्य कोण
गुरु -ईशान कोण
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मेषादि राशि अनुसार दिशा
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मेष ,सिंह,धन-पूर्व दिशा
वृषभ,कन्या ,मकर -दक्षिण दिशा
मिथुन,तुला,कुम्भ -पश्चिम दिशा
कर्क ,वृश्चिक ,मीन - उत्तर दिशा
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प्रश्न कुंडली में चतुर्थ भाव चोरी हुई चीज का हे ,यानी चतुर्थ स्थान चोरी हुई चीज कहा हे यह जानने में उपयोगी हे .चतुर्थ भाव में जो राशी हो ,वह राशि चोरी हुई चीज कहा हे उस तरफ इशारा करती हे
मेष ,सिंह ,धन,अग्नि तत्व राशि हे ,यानी उस चीज के पास अथवा जहा आग सम्बन्धी कोई भी कार्य होता हो वहा वृषभ ,कन्या ,मकर पृथ्वी तत्व राशी यानी जमीन के पास या अन्दर दबाई हुई हो ..कर्क ,वृश्चिक,मीन जलचर राशि पानी रखनेकी जगह के पास (घर में )नदी ,दरिया किनारा के पास या पानी में छिपाई हुई हो
चतुर्थ भाव में रहा ग्रह या चतुर्थेश बनता ग्रह चोरी हुई चीज कहा हे उसका दिशा निर्देश करता हे
चतुर्थ स्थान में शनि हो या चतुर्थेश शनि हो तो चीज कोई गन्दी जगह में जहा कूड़ा कचरा फेकने की जगह में छुपाई हे ,,इसी प्रकार चन्द्र हो तो पानी ,बाथरूम ,कुए ,तालाब के पास गुरु हो तो मंदिर ,धार्मिक स्थान या पवित्र जगह मंगल हो तो अग्नि के पास ,शुक्र हो तो बिस्तर के पास -निचे या आजूबाजू ,बुध हो तो लायब्रेरी (किताबे रखने की जगह )रसोई घर और सूर्य हो तो घर के मुखिया के बेठने की सिट के आसपास छुपी हुई हे
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नष्ट वस्तु दिशा ज्ञान
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दिग्वाच्या केंद्रगतैरससंभवे वा वदेद्विलग्नर्क्षात्|
मध्याच्च्युतैर्विलग्नान्नवांशकैर्योजना वाच्या||(षट पंचाशिका ६/४)
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अर्थ
केंद्र स्थित बलवान गृह से नष्ट वास्तु की दिशा का विचार करना चाहिए
यह संभव न हो तो लग्न में स्थित राशी की दिशा के अनुसार निर्णय करना चाहिए लग्न स्थित नवमांश अनुसार वास्तु की दुरी का निर्णय करना चाहिए
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प्रस्तुत श्लोक नष्ट वस्तु की दिशा और दुरी का निर्देश करता हे
केंद्र में स्थित ग्रह से नष्ट वस्तु की दिशा का निर्णय करना चाहिए जो केंद्र में एक से ज्यादा ग्रह हो तो सबसे ज्यादा बलवान ग्रह से दिशा निर्णय करना चाहिए
केंद्र में सभी ग्रह निर्बल हो या केंद्र में ग्रह न हो तो लग्न में जो राशी हो उस राशी द्वारा निर्णय करना चाहिए
लग्न में प्रथम ,द्वितीय........नवम जो नवमांश हो उस से वस्तु की दुरी का निर्देश करे
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सूर्यादि ग्रहों की दिशा
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सूर्य - पूर्व दिशा
मंगल -दक्षिण दिशा
शनि-पश्चिम दिशा
बुध -उत्तर दिशा
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शुक्र -अग्नि कोण
राहू- नैरुत्य कोण
चन्द्र -वायव्य कोण
गुरु -ईशान कोण
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मेषादि राशि अनुसार दिशा
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मेष ,सिंह,धन-पूर्व दिशा
वृषभ,कन्या ,मकर -दक्षिण दिशा
मिथुन,तुला,कुम्भ -पश्चिम दिशा
कर्क ,वृश्चिक ,मीन - उत्तर दिशा
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