गुरुवार, 5 सितंबर 2013

व्यवसाय निर्णय विचाराधीन बिंदु

व्यवसाय निर्णय विचाराधीन बिंदु
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जन्मकुंडली का प्रथम स्थान लग्न बिंदु जो जीवन का आरम्भ बिंदु हे, लग्न भाव से जातक की गुप्त शक्तिया ,जीवन की स्थिरता /अथिरता ,बल,,लग्न भाव से ही होती हे
अत: किसी भी जातक के जीवन के लिए लग्न को लक्ष्य में लेना जरुरी हे
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चन्द्र
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जातक की मन:स्थिति उसके कार्य करने गतिविधि का आधार उसका मानसिक रवैया और आवेग पर ज्यादा रहेता हे व्यापार में होनेवाले लाभ /हानि को झेल सके इस लिए यहाँ चन्द्र का भी विचार आवश्यक हे
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बुध
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बुध बुध्धि के साथ व्यापार का भी कारक ग्रह हे अत: यहाँ बुध का भी महत्त्व कम नही हे
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सूर्य
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सूर्य ग्रह जीवन शक्ति का द्योतक हे ,पृथिवी का कोई भी प्रदार्थ सूर्य के बिना संभव नही सूर्य सर्व जीवो का प्राण और मानव शरीर का आत्मा हे
सूर्य की जन्म कुंडली में स्थिति के आधार पर जातक की शक्ति ,बल ,आत्मा ,विचार होता हे
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दसम स्थान /चतुर्थ स्थान
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लग्न भाव विचार दसम स्थान उस विचार का कार्य (कर्म ) हे
व्यवसाय निर्णय के लिए कर्म स्थान देखना आवश्यक हे ,जातक के किये हुए कर्म के आधार पर इच्छित सुख प्राप्त होगे या नही उसका निर्णय चतुर्थ भाव से मिलता हे जातक कितना भी महेन्तु ,उद्यमी हो पर उसे जीवन में सुख की प्राप्ति न हो तो कर्म का कोई औचित्य नही रहेगा कर्म की सफलता ही सुख हे

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नवम भाव (भाग्य )
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जातक के विचार ,कर्म ,सुख की इच्छा भाग्य से ही होती हे यह उसके भाग्य में हे या नही यह भी जनना जरुरी हे
नवम स्थान दसम से द्वितीय हे इसका मतलब भाग्य ही कर्म को जन्म देता हे भाग्य पहेले कर्म उसके बाद आता हे ,भाग्य के बिना सब अर्थ हिन् हो जाता हे
किसी भी कार्य का विचार करो कर्म के मध्यम से उसका अमल करने मात्र से सुख नही मिलता या सिध्धि के लिए किये हुए कर्म से सिध्धि मिलती हे ऐसा भी नही हे भाग्य होगा तो कर्म फलता हे
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आत्म कारक ग्रह
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जातक के जन्म समय पर नभोमंडल में जो ग्रह ज्यादा अंश का होता हे वह ग्रह आत्म कारक कहेलाता हे आत्मकारक ग्रह के आधार पर जातक की आजीविका का क्षेत्र तय होता हे आत्मकारक ग्रह बलवान होगा तो व्यक्ति व्यापार के क्षेत्र में उच्च स्थान पर पहुचेगा
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कारकांश कुंडली
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आत्मकारक ग्रह नवमांश कुंडली में जिस राशी में होता हे उस राशी को लग्न मान कर अन्य ग्रह नवमांश कुंडली के अनुसार जिस जिस राशी में हो उस राशी में रखने से कारकांश कुंडली बनती हे
कारकांश कुंडली का दशम भाव और लग्न के आधार पर भी व्योपार के क्षेत्र का विचार किया जाता हे
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